Wednesday, June 30, 2021

85 सूरह अल बुरुज

सूरह अल बुरुज मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 22 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़सम है बुर्जों वाले आसमान की.
2. और क़सम है उस दिन की, जिसका वादा किया गया है.
3. और क़सम है हाज़िर होने वाले की और क़सम है उसकी, जो कुछ हाज़िर किया जाएगा.
4. ख़ंदक़ खोदने वाले हलाक कर दिए गए.
5. यानी आग की ख़दक़, जिसमें ईंधन झोंका गया था.
6. जब वे लोग उसके किनारे बैठे हुए थे.
7. और वे ख़ुद उसके गवाह थे, जो कुछ वे मोमिनों के साथ कर रहे थे यानी उन्हें आग में डाल रहे थे.
8. और उन्हें मोमिनों का अल्लाह पर ईमान लाना नागवार गुज़रा, जो बड़ा ग़ालिब और सज़ावारे हम्दो सना है यानी तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं.
9. जो आसमानों और ज़मीन का बादशाह है. और अल्लाह हर चीज़ का गवाह है.
10. बेशक जिन लोगों ने मोमिन मर्दों और मोमिन औरतों को अज़ीयतें दीं. फिर तौबा भी नहीं की, तो उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है और उनके लिए आग में जलने का अज़ाब है.
11. बेशक जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, उनके लिए जन्नत के सदाबहार बाग़ हैं, जिनके नीचे नहरें बहती हैं. यह बहुत बड़ी कामयाबी है.
12. बेशक तुम्हारे परवरदिगार की गिरफ़्त बहुत सख़्त है.
13. बेशक अल्लाह ही पहली बार पैदा करता है और वही दोबारा ज़िन्दा करेगा.
14. और अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला और बहुत मुहब्बत करने वाला है. 
15. अर्श का मालिक बड़ा आलीशान है.
16. वह जो चाहता है, कर देता है.
17. क्या तुम्हें लश्करों की ख़बर मिली?
18. फ़िरऔन और समूद के लश्करों की ख़बर?
19. लेकिन कुफ़्र करने वाले लोग तो झुठलाने में लगे हुए हैं.
20. और अल्लाह उन्हें हर तरफ़ से घेरे हुए है.
21. बल्कि यह क़ुरआन बड़ी अज़मत वाला है, 
22. जो लौहे महफ़ूज़ में लिखा हुआ है.

Tuesday, June 29, 2021

86 सूरह अत तारीक़

सूरह अत तारीक़ मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 17 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़सम है आसमान की और क़सम है रात को नज़र आने वाले की.
2. और क्या तुम जानते हो कि रात को नज़र आने वाला क्या है?
3. वह चमकता हुआ सितारा है.
4. कोई शख़्स ऐसा नहीं, जिस पर निगेहबान फ़रिश्ता मुक़र्रर नहीं है.
5. फिर इंसान को ग़ौर करना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है.
6. उसे उछलते हुए पानी से पैदा किया गया है,
7. जो कमर और सीने के बीच से निकलता है.
8. बेशक अल्लाह उसे दोबारा ज़िन्दा करने पर क़ादिर है.
9. जिस दिन सब पोशीदा राज़ ज़ाहिर कर दिए जाएंगे,
10. फिर उसके पास न कोई क़ूवत होगी और न कोई उसका मददगार होगा.
11. और क़सम है बारिश बरसाने वाले आसमान की.
12. और क़सम है ज़मीन की, जो शिगाफ़्ता हो जाएगी.
13. बेशक यह क़ुरआन क़ौले फ़ैसल है.
14. और यह कोई मज़ाक़ नहीं है.
15. बेशक वे काफ़िर साज़िशें कर रहे हैं.
16. और हम अपनी तदबीर कर रहे हैं.
17. फिर तुम काफ़िरों को मोहलत दो. उन्हें थोड़ी सी मोहलत और दे दो. 

Monday, June 28, 2021

87 सूरह अल आला

सूरह अल आला मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 19 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! अपने परवरदिगार के नाम की तस्बीह किया करो, जो सबसे आला है. 
2. जिसने कायनात की तख़लीक़ की और उसे संवारा.
3. और जिसने हर चीज़ के लिए क़ायदे बनाए और रास्ते मुक़र्रर किए.
4. और जिसने चारा उगाया.
5. फिर उसे ख़ुश्क करके स्याह कर दिया.
6. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! हम तुम्हें इस तरह पढ़ाएंगे, जिसे तुम कभी नहीं भूलोगे.
7. लेकिन होता वही है, जो अल्लाह चाहता है. बेशक वह हर ज़ाहिरी और पोशीदा बात को ख़ूब जानता है.
8. हम तुम्हारी सहूलत के लिए आसानी पैदा करेंगे. 
9. फिर तुम नसीहत करते रहो, अगर नसीहत करना नफ़ा दे.
10. वही नसीहत हासिल करेगा, जो अल्लाह से ख़ौफ़ रखता होगा. 
11. और बदबख़्त इससे गुरेज़ करेगा.
12. जो बहुत भड़कती हुई आग में डाला जाएगा.
13. फिर वह उसमें न मरेगा और न जिएगा.
14. बेशक वही कामयाब होगा, जिसने ख़ुद को गुनाहों से पाक रखा.
15. और जिसने अपने परवरदिगार के नाम का ज़िक्र किया और नमाज़ पढ़ी.
16. लेकिन तुम दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह देते हो.
17. हालांकि आख़िरत बेहतर और बाक़ी रहने वाली है.
18. बेशक यह बात पहले के सहीफ़ों में भी कही गई है.
19. यानी इब्राहीम अलैहिस्सलाम और मूसा अलैहिस्सलाम के सहीफ़ों में भी लिखी हुई है.

Sunday, June 27, 2021

88 सूरह अल गाशीयह

सूरह अल गाशीयह मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 26 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क्या तुम्हें हर चीज़ पर छा जाने वाली क़यामत की ख़बर मिली?
2. उस दिन बहुत से चेहरे ज़लील व ख़्वार होंगे. 
3. अपने आमाल के सबब मुसीबत झेलते हुए थके मांदे  
4. दहकती हुई आग में डाले जाएंगे.
5. उन्हें खौलते हुए चश्मे का पानी पिलाया जाएगा.
6. और उनके लिए ख़ारदार ख़ुश्क ज़हरीली झाड़ियों के सिवा खाने को कुछ नहीं होगा.
7. यह खाना न जिस्म को लगेगा और न भूख मिटाएगा.
8. और उस दिन बहुत से चेहरे तरोताज़ा होंगे.
9. वे अपनी नेक कोशिशों पर ख़ुश व ख़ुर्रम होंगे.
10. वे आलीशान जन्नत में होंगे. 
11. उसमें कोई बेहूदा बात नहीं सुनेंगे.
12. उसमें चश्मे बहते होंगे.
13. उसमें ऊंचे-ऊंचे तख़्त बिछे हुए होंगे,
14. और प्याले क़रीने से रखे हुए होंगे.
15. और गाव तकिये क़तार में लगे हुए होंगे.
16. और मख़मली क़ालीनें बिछी हुई होंगी.
17. क्या वे लोग ऊंट की तरफ़ नहीं देखते कि उसे कैसा अजीब बनाया गया है?
18. और आसमान की तरफ़ नहीं देखते कि उसे कितना बुलंद किया गया है.
19. और पहाड़ों की तरफ़ नहीं देखते कि वे कैसे खड़े किए गए हैं.
20. और ज़मीन की तरफ़ नहीं देखते कि वह किस तरह गोलाई के बावजूद बिछाई गई है.
21. ऐ रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! फिर तुम नसीहत करते रहो कि तुम तो नसीहत करने वाले हो.
22. तुम्हें उन पर ज़िम्मेदार बनाकर मुसल्लत नहीं किया गया है.
23. लेकिन जिसने मुंह फेरा और कुफ़्र किया
24. तो अल्लाह उसे बड़ा अज़ाब देगा.
25. बेशक उन्हें हमारी तरफ़ ही लौटना है.
26. फिर बेशक हमारे ही ज़िम्मे उनका हिसाब लेना है.

Saturday, June 26, 2021

89 सूरह अल फ़ज्र

सूरह अल फ़ज्र मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 30 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़सम है फ़ज्र की यानी सुबह की 
2. और क़सम है दस रातों की
3. और क़सम है जुफ़्त की और क़सम है ताक़ की
4. और क़सम है रात की, जब वह गुज़रने लगे.
5. बेशक अक़्लमंदों के लिए ये बड़ी क़समें हैं.
6. क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे परवरदिगार ने हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम आद के साथ कैसा सुलूक किया?
7. जो अहले इरम थे और बड़े-बड़े सुतूनों वाले थे. 
8. उन जैसे लोग दुनिया के किसी शहर में पैदा ही नहीं हुए.
9. और सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम समूद के साथ कैसा सुलूक किया, जो वादी ए क़री में पहाड़ तराश कर घर बनाते थे.
10. और फ़िरऔन के साथ कैसा सुलूक किया, जो लोगों को मेख़ों से सज़ा देता था.
11. यही वे लोग थे, जिन्होंने मुख़्तलिफ़ शहरों में सरकशी की थी.
12. फिर उनमें ख़ूब फ़साद फैलाया था.
13. फिर तुम्हारे परवरदिगार ने उन पर अज़ाब के कोड़े बरसाये.
14. बेशक तुम्हारा परवरदिगार ज़ालिमों पर नज़र रखे हुए है.
15. फिर जब इंसान को उसका परवरदिगार राहत में आज़माता है और उसे इज़्ज़त और नेअमत से नवाज़ता है, तो वह कहता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे इज़्ज़त बख़्शी है.
16. और जब वह उसे तकलीफ़ में आज़माता है और उसका रिज़्क़ तंग कर देता है, तो वह कहता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे ज़लील कर दिया.  
17. ऐसा हरगिज़ नहीं है, बल्कि तुम लोग यतीमों की इज़्ज़त नहीं करते,
18. और न तुम मिस्कीनों यानी ग़रीबों और मोहताजों को खाना खिलाने के लिए एक दूसरे को तरग़ीब देते हो.
19. और तुम मीरास का सारा माल समेट कर खा जाते हो.
20. और तुम माल व दौलत से बहुत ज़्यादा मुहब्बत करते हो.
21. जान लो कि जब ज़मीन कूट-कूट कर रेज़ा-रेज़ा कर दी जाएगी,
22. और तुम्हारा परवरदिगार जलवा फ़रोश होगा और फ़रिश्ते क़तार दर क़तार हाज़िर होंगे.
23. और जिस दिन जहन्नुम सामने कर दी जाएगी, तो उस दिन इंसान सोचेगा, लेकिन अब सोचने से क्या होगा.
24. उस वक़्त वह कहेगा कि काश ! मैंने अपनी इस ज़िन्दगी के लिए पहले कुछ भेजा होता.
25. फिर उस दिन अल्लाह जो अज़ाब देगा, वैसा अज़ाब देने वाला कोई नहीं है.
26. और न कोई उसकी तरह मज़बूत गिरफ़्त में लेगा. 
27. नेक लोगों से कहा जाएगा कि ऐ इत्मीनान पाने वाली जान !
28. तू अपने परवरदिगार की तरफ़ इस हाल में लौट आ कि तू उससे राज़ी और वह तुझसे राज़ी है.
29. फिर तू हमारे बन्दों में शामिल हो जा.
30. और हमारी जन्नत में दाख़िल हो जा.

Friday, June 25, 2021

90 सूरह अल बलद

सूरह अल बलद मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 20 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़सम है इस शहर मक्का की.
2. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! और तुम इस शहर में हो.
3. और क़सम है वालिद यानी आदम अलैहिस्सलाम और उनकी औलाद की.
4. बेशक हमने इंसान को मशक़्क़त में रहने वाला बनाया है.
5. क्या वह ये गुमान करता है कि उस पर हरगिज़ कोई भी क़ाबू नहीं पा सकेगा.
6. वह कहता है कि मैंने बहुत सा माल ख़र्च किया है.
7. क्या वह ये गुमान करता है कि उसे किसी ने नहीं देखा.
8. क्या हमने उसके लिए दो आंखें नहीं बनाईं?
9. और उसे एक ज़बान और दो होंठ नहीं दिए.
10. और हमने उसे अच्छे और बुरे दोनों रास्ते भी दिखा दिए.
11. फिर भी वह घाटी में से होकर नहीं गुज़रा.
12. और तुम क्या जानो कि घाटी क्या है?
13. किसी की गर्दन का आज़ाद कराना यानी किसी को ग़ुलामी से आज़ाद कराना या किसी का क़र्ज़ उतारना.  
14. या भूख के दिन खाना खिलाना 
15. किसी यतीम रिश्तेदार को
16. या किसी मोहताज ख़ाकसार को. 
17. फिर वह उन लोगों में से हो, जो ईमान लाए हैं और एक दूसरे को सब्र की वसीयत और बाहमी रहम करने की भी वसीयत करते हैं.
18. ये लोग दायीं तरफ़ वाले यानी ख़ुशनसीब हैं.
19. और जिन लोगों ने हमारी आयतों से कुफ़्र किया है, वे बायीं तरफ़ वाले यानी बदबख़्त हैं,
20. और उन पर हर तरफ़ से बंद की हुई आग होगी यानी वे लोग आग में घिरे हुए होंगे.

Thursday, June 24, 2021

91 सूरह अश शम्स

सूरह अश शम्स मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 15 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. और क़सम है सूरज की और उसकी रौशनी की
2. और क़सम है चांद की, जब वह उसके पीछे-पीछे आए.
3. और क़सम है दिन की, जब वह सूरज को जलवा फ़रोश करे.
4. और क़सम है रात की, जब वह ज़मीन के एक हिस्से को छुपा ले 
5. और क़सम है आसमान की और उस ज़ात की, जिसने उसे बनाया.
6. और क़सम है ज़मीन की और उस ज़ात की, जिसने उसे बिछाया.
7. और क़सम है नफ़्स की और उस ज़ात की, जिसने उसे संवारा.
8. फिर अल्लाह ने उसे बदकारी और परहेज़गारी की समझ दी. 
9. बेशक वह कामयाब हुआ, जिसने अपनी नफ़्स को पाक रखा.
10. और बेशक वह नाकाम हुआ, जिसने उसे ख़ाक में मिला दिया.
11. क़ौमे समूद ने अपनी सरकशी से अपने पैग़म्बर सालेह अलैहिस्साम को झुठलाया.
12. जब उन लोगों में से एक बदबख़्त खड़ा हुआ,
13. फिर अल्लाह के रसूल पैग़म्बर सालेह अलैहिस्साम ने उनसे कहा कि अल्लाह की ऊंटनी की हिफ़ाज़त करना और उसकी बारी पर उसे पानी पिलाना.
14. फिर उन्होंने पैग़म्बर को झुठलाया और ऊंटनी की कूंचें काट दीं. फिर अल्लाह ने उनके गुनाहों की वजह से उन पर हलाकत नाज़िल कर दी. फिर उनकी बस्ती को तबाह व बर्बाद करके उसे बराबर कर दिया. 
15. और अल्लाह को अंजाम का कोई ख़ौफ़ नहीं होता.

Wednesday, June 23, 2021

92 सूरह अल लैल

सूरह अल लैल मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 21 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. और क़सम है रात की, जब वह छा जाए.
2. और क़सम है दिन की, जब वह चमक उठे.
3. और क़सम है उस ज़ात की, जिसने नर और मादा को पैदा किया.
4. बेशक तुम्हारी कोशिशें मुख़्तलिफ़ हैं.
5. फिर जिसने अल्लाह की राह में अपना माल दिया और परहेज़गारी इख़्तियार की 
6. और अच्छी बात की तसदीक़ की
7. फिर हम अनक़रीब उसके लिए आसानी पैदा कर देंगे.  
8. और जिसने बुख़्ल किया और राहे हक़ में माल ख़र्च करने से बेपरवाह रहा
9. और अच्छी बात को झुठलाया,
10. तो हम अनक़रीब उसे सख़्ती में पहुंचा देंगे.
11. और उसका माल उसके कुछ भी काम नहीं आएगा, जब वह दोज़ख़ के गड्ढे में गिरेगा.
12. बेशक राह दिखाना हमारे ज़िम्मे है.
13. और बेशक आख़िरत और दुनिया हमारी ही मिल्कियत हैं.
14. फिर हमने तुम्हें दोज़ख़ की भड़कती हुई आग से ख़बरदार कर दिया है.
15. जिसमें वही डाला जाएगा, जो बड़ा बदबख़्त होगा,
16. जिसने हक़ को झुठलाया और मुंह फेर लिया.
17. और अनक़रीब उसे दोज़ख़ की आग से बचा लिया जाएगा, जो परहेज़गार होगा.
18. जो अपना माल अल्लाह की राह में ख़र्च करता है, ताकि वह पाक हो जाए.
19. और किसी का उस पर अहसान नहीं है कि जिसका उसे बदला उतारना है,
20. लेकिन वह सिर्फ़ अपने आला परवरदिगार की ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए ऐसा करता है.
21. और अनक़रीब वह अल्लाह की अता से राज़ी हो जाएगा.

Tuesday, June 22, 2021

93 सूरह अज़ ज़ुहा

सूरह अज़ ज़ुहा मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 11 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! क़सम है चाश्त के वक़्त की, जब दिन चढ़े सूरज की सुनहरी धूप फैल जाती है.  
2. और क़सम है स्याह रात की, जब वह छा जाए. 
3. तुम्हारे परवरदिगार ने जबसे तुम्हारा इंतख़ाब किया है, तब से उसने न तुम्हें छोड़ा है और न वह तुमसे नाराज़ ही हुआ है.
4. और बेशक तुम्हारा आने वाला वक़्त, तुम्हारे गुज़रे हुए वक़्त से बेहतर है.
5. और अनक़रीब तुम्हारा परवरदिगार तुम्हें इस क़द्र अता करेगा कि तुम राज़ी हो जाओगे.
6. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! क्या हमने तुम्हें यतीम पाकर तुम्हें पनाह नहीं दी.  
7. और उसने तुम्हें अपनी मुहब्बत में ग़र्क पाया, तो मंज़िले मक़सूद तक पहुंचा दिया.
8. और उसने तुम्हें मुफ़लिस पाया, तो ग़नी कर दिया. यानी अल्लाह ने तुम्हें अपने क़ुर्ब का तालिब पाया, तो अपनी लज़्ज़ते दीद से नवाज़ कर हमेशा के लिए हर तलब से बेनियाज़ कर दिया.
9. फिर तुम भी किसी यतीम पर क़हर न ढहाना.
10. और किसी सवाली को मत झिड़कना. यानी अपने दर के किसी मांगने वाले को मत झिड़कना.
11. और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ख़ूब तज़्किरा किया करो.

Monday, June 21, 2021

94 सूरह अल इंशिराह

सूरह अल इंशिराह मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 8 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है 
1. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! क्या हमने तुम्हारा सीना अनवारे इल्म और हिकमत के लिए कुशादा नहीं कर दिया है. 
2. और हमने तुम पर से तुम्हारा बोझ उतार दिया.
3. जो तुम्हारी पुश्त पर भारी था.
4. और हमने तुम्हारे लिए तुम्हारा ज़िक्र अपने ज़िक्र में शामिल करके तुम्हें दुनिया और आख़िरत में हर जगह बुलंद कर दिया. 
5. फिर बेशक हर मुश्किल के साथ आसानी है. 
6. बेशक हर मुश्किल के साथ आसानी भी है.
7. फिर जब तुम ख़ल्क़ के तमाम फ़राइज़ से फ़ारिग़ हो जाओ, तो ज़िक्रे इलाही और इबादत में मेहनत किया करो,
8. और अपने परवरदिगार की तरफ़ राग़िब हो जाया करो. यानी अपने परवरदिगार से लौ लगाओ.

Sunday, June 20, 2021

95 सूरह अत तीन

सूरह अत तीन मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 8 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़सम है अंजीर की और क़सम है ज़ैतून की. 
2. और क़सम है सहरा-ए सीना के पहाड़ तूर की
3. और क़सम है इस अमन वाले शहर मक्का की.
4. बेशक हमने इंसान को बहुत ही ख़ूबसूरत सांचे में ढाल कर पैदा किया है.
5. फिर हमने उसे पस्त से पस्त हालत में लौटा दिया. 
6. सिवाय उन लोगों के, जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, तो उनके लिए कभी ख़त्म न होने वाला दाइमी अज्र है.
7.  फिर इसके बाद तुम जज़ा और सज़ा के दिन को क्यों झुठलाते हो?
8. क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं है?

Saturday, June 19, 2021

96 सूरह अल अलक़

सूरह अल अलक़ मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 19 आयतें हैं.
अल्लाह शुरू के नाम से, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! पढ़ो, अपने परवरदिगार का नाम लेकर, जिसने पैदा किया है.
2. जिसने इंसान को ख़ून के क़तरे से पैदा किया.
3. पढ़ो, और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा ही करीम है,
4. जिसने क़लम के ज़रिये लिखने पढ़ने की तालीम दी.
5. जिसने इंसान को वह इल्म सिखाया, जो वह नहीं जानता था. 
6. जान लो कि बेशक इंसान सरकशी करता है.
7. और यह गुमान करता कि वह किसी का मोहताज नहीं है.
8. बेशक तुम्हें अपने परवरदिगार की तरफ़ ही लौटना है.
9. क्या तुमने उस शख़्स को देखा है, जो मना करता है.
10. अल्लाह के बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है.
11. भला देखो कि अगर वह हिदायत पर होता  
12. या वह लोगों को परहेज़गारी का हुक्म देता, तो कितना अच्छा होता.
13. भला देखो कि अगर उसने हक़ को झुठला दिया और मुंह फेर लिया, तो उसका क्या अंजाम होगा. 
14. तो क्या वह नहीं जानता कि अल्लाह देख रहा है.
15. जान लो कि अगर वह बाज़ नहीं आया, तो हम ज़रूर पेशानी के बाल पकड़कर उसे घसीटेंगे.
16. झूठे और ख़तावार की पेशानी के बाल
17. फिर वह मदद के लिए अपने हिमायतियों को बुलाए.
18. हम भी अपने सिपाहियों को बुलाएंगे. यानी दोज़ख़ के अज़ाब देने वाले फ़रिश्तों को बुलाएंगे.
19. देखो कि तुम उसका कहना नहीं मानना और ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! तुम अल्लाह को सजदे किया करो और उसका क़ुर्ब हासिल करो.

Friday, June 18, 2021

097 सूरह अल क़द्र

सूरह अल क़द्र मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 5 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. बेशक हमने इस क़ुरआन को शबे क़द्र में नाज़िल किया.
2. और तुम क्या जानते हो कि शबे क़द्र क्या है?
3. शबे क़द्र हज़ार महीनों से बेहतर है.                        
4. इस रात में फ़रिश्ते और रूहुल अमीन यानी जिब्रईल अलैहिस्सलाम अपने परवरदिगार के हुक्म से हर काम के लिए ज़मीन पर उतरते हैं.
5. यह रात फ़ज्र होने तक सलामती है.

Thursday, June 17, 2021

098 सूरह अल बैयिनह

सूरह अल बैयिनह मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 8 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. अहले किताब में से जिन्होंने कुफ़्र किया और मुशरिक उस वक़्त तक अपने कुफ़्र से बाज़ आने वाले नहीं थे, जब तक कि उनके पास वाज़ेह दलील न आ जाती.
2. अल्लाह के रसूल जो पाक सहीफ़े पढ़ते हैं.
3. जिनमें मुस्तहकम अहकाम लिखे हुए हैं. 
4. और और जिन लोगों को किताब दी गई थी, वे वाज़ेह दलील आने के बाद ही फ़िरकों में तक़सीम हो गए. यानी जिन लोगों को अल्लाह की किताब ज़ुबूर और तौरात और इंजील दी गई थी, वे आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इस दुनिया में तशरीफ़ लाने के बाद आपसी हसद की वजह से फ़िरकों में तक़सीम हो गए.
5. और उन लोगों को सिर्फ़ यही हुक्म दिया गया था कि वे अल्लाह ही की इबादत करें. हर बातिल से जुदा होकर अपनी इबादत को ख़ालिस रखें और पाबंदी से नमाज़ पढ़ें और ज़कात देते रहें. और यही सच्चा और मुस्तहकम दीन है.
6. बेशक अहले किताब में से जिन लोगों ने कुफ़्र किया और मुशरिक सव जहन्नुम की आग में पड़े होंगे. वे हमेशा उसमें रहेंगे. वे लोग बदतरीन मख़लूक़ हैं.
7. और बेशक जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, ये लोग बेहतरीन मख़लूक़ हैं.
8. उनकी जज़ा उनके परवरदिगार के पास जन्नत के सदाबहार बाग़ हैं, जिनके नीचे नहरें बहती हैं. वे हमेशा-हमेशा उनमें रहेंगे. अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वे अल्लाह से राज़ी हैं. यह उनके लिए है, जो अपने परवरदिगार से ख़ौफ़ रखते हैं. 

Wednesday, June 16, 2021

99 सूरह अज़ ज़िल्ज़ाल

सूरह अज़ ज़िल्ज़ाल मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 8 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. जब ज़मीन ज़लज़ले से हिला दी जाएगी. 
2. और ज़मीन अपने सब बोझ बाहर निकाल देगी.
3. और इंसान कहेगा कि इसे क्या हुआ है?
4. उस दिन वह अपने हालात बयान कर देगी.
5. क्योंकि तुम्हारे परवरदिगार ने ही उसे हुक्म दिया होगा.
6. उस दिन लोगों के मुख़्तलिफ़ गिरोह बाहर आएंगे, ताकि उन्हें उनके आमाल दिखाए जाएंगे.
7. फिर जिसने ज़र्रा बराबर भी नेकी की होगी, तो वह उसे देख लेगा. 
8. और जिसने ज़र्रा बराबर भी बुराई की होगी, तो वह उसे देख लेगा. 

Tuesday, June 15, 2021

100 सूरह अल आदियात

सूरह अल आदियात मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 11 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़सम है तेज़ दौड़ने वाले घोड़ों की, जो हांफ़ते हैं.
2. फिर जिनकी टापों से चिंगारियां निकलती हैं. 
3. फिर जो सुबह होते ही दुश्मनों पर हमला करते हैं.
4. फिर गर्द ग़ुबार उड़ाते हैं
5. फिर वे दुश्मनों की जमात में घुस जाते हैं.
6. और बेशक वह अपनी नाशुक्री का ख़ुद गवाह है.
7. और बेशक वह इस नाशुक्री का ख़ुद गवाह है. 
8. और बेशक वह माल व दौलत से शदीद मुहब्बत करने वाला है.
9. क्या वह नहीं जानता कि जब लोग क़ब्रों में से उठाए जाएंगे
10. और दिलों के पोशीदा राज़ ज़ाहिर कर दिए जाएंगे.
11. बेशक उनका परवरदिगार उस दिन उनके आमाल से ख़ूब बाख़बर होगा.

Monday, June 14, 2021

101 सूरह अल क़ारिया

सूरह अल क़ारिया मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 11 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. गरजने वाली ख़ौफ़नाक आवाज़
2. गरजने वाली ख़ौफ़नाक आवाज़ क्या है?
3. और क्या तुम जानते हो कि गरजने वाली ख़ौफ़नाक आवाज़ क्या है?
4. जिस दिन लोग परवानों की तरह बिखर जाएंगे.
5. और पहाड़ धुनी हुई रंग बिरंगी ऊन की तरह हो जाएंगे.
6. फिर जिसके नेकियों के पलड़े भारी होंगे.
7. तो वह मनचाहे ऐशो आराम में होगा.
8. और जिसके नेकियों के पलड़े हल्के होंगे.
9. तो उसका ठिकाना हाविया में होगा.
10. और क्या तुम जानते हो कि हाविया क्या है?
11. वह दोज़ख़ की दहकती हुई आग है.    
 

Sunday, June 13, 2021

102 सूरह अत तकासूर

सूरह अत तकासूर मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 8 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. तुम्हें दुनिया की ख्व़ाहिशों ने आख़िरत से ग़ाफ़िल कर रखा है. 
2. यहां तक कि तुम क़ब्रें देख लेते हो. यानी मौत के बाद क़ब्रिस्तान पहुंच जाते हो.
3. देखो कि तुम अनक़रीब जान जाओगे. 
4 देखो कि तुम अनक़रीब जान जाओगे.
5. फिर देखो कि तुम अनक़रीब जान लोगे .
6. तुम ज़रूर जहन्नुम को देखोगे.
7. फिर तुम ज़रूर उसे यक़ीन की आंखों से देखोगे. यानी अपनी आंखों से देखोगे.
8. फिर उस दिन तुमसे अल्लाह की नेअमतों के बारे में पूछा जाएगा. 

Saturday, June 12, 2021

103 सूरह अल अस्र

सूरह अल अस्र मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 3 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़सम है अस्र की
2. बेशक इंसान नुक़सान में है.
3. सिवाय उन लोगों के, जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करते रहे और एक दूसरे को हक़ की वसीयत की और सब्र की भी वसीयत करते रहे.

Friday, June 11, 2021

104 सूरह अल हुमज़ह

सूरह अल हुमज़ह मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 9 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. हर उस शख़्स के लिए तबाही है, जो ताने देने वाला और ऐबजोई करने वाला है.
2. जिसने माल जमा किया और उसे गिन-गिन कर रखा.
3. उसे यह गुमान है कि उसका माल उसे हमेशा ज़िन्दा रखेगा. 
4. हरगिज़ नहीं, वह यक़ीनन हुतमा में डाला जाएगा. 
5. और तुम नहीं जानते कि हुतमा क्या है? 
6. वह अल्लाह की भड़काई हुई आग है. 
7. जो दिलों तक चढ़ जाएगी.
8. बेशक वह आग उन पर हर तरफ़ से बंद कर दी जाएगी. 
9. वे लोग आग से घिरे लम्बे-लम्बे सुतूनों में घिरे होंगे.

Thursday, June 10, 2021

105 सूरह अल फ़ील

सूरह अल फ़ील मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 5 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे परवरदिगार ने हाथी वालों के साथ कैसा सुलूक किया.
2. क्या उसने उनकी साज़िश को नाकाम नहीं कर दिया. 
3. और उसने उन पर अबाबील परिन्दों झुंड के झुंड भेज दिए.
4. जिन्होंने उन पर कंकर पत्थर फेंके  
5. फिर उन्हें चबाये हुए भूसे की तरह कर पामाल दिया.  

Wednesday, June 9, 2021

106 सूरह अल क़ुरैश

सूरह अल क़ुरैश मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 4 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़ुरैश के लोग आदी हैं 
2. यानी वे सर्दी और गर्मी के मौसम में यमन और मुल्क शाम का सफ़र करने के आदी हैं 
3. फिर उन्हें चाहिए कि वे ख़ाना ए काबा के परवरदिगार की इबादत करें.
4. जिसने उन्हें भूख में खाना दिया और ख़ौफ़ से अमान में रखा.

Tuesday, June 8, 2021

107 सूरह अल माऊन

सूरह अल माऊन मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 7 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! क्या तुमने उन्हें देखा है, जो जज़ा के दिन को झुठलाते हैं. 
2. तो यही वे लोग हैं, जो यतीमों को धक्के देते हैं.
3. और किसी मिस्कीन यानी ग़रीब और मोहताज को खाना खिलाने की तरग़ीब नहीं देते.
4. फिर ऐसे नमाज़ियों के लिए तबाही है. 
5. जो अपनी नमाज़ों से ग़ाफ़िल हैं. यानी जो अपने फ़र्ज़ से ग़ाफ़िल हैं. 
6. जो दिखावा करते हैं. यानी जो लोग इबादत और अमल दिखावे के लिए करते हैं.
7. और जो रोज़मर्रा की बरतने वाली चीज़ें मांगने पर भी लोगों को नहीं देते.

Monday, June 7, 2021

108 सूरह अल कौसर

सूरह अल कौसर मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 3 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! बेशक हमने तुम्हें कौसर अता किया.
2. तुम अपने परवरदिगार के लिए नमाज़ पढ़ो करो और क़ुर्बानी दिया करो.
3. बेशक तुम्हारा दुश्मन ही बेनाम और बेनिशान रहेगा.

Sunday, June 6, 2021

109 सूरह अल काफ़िरून

सूरह अल काफ़िरून मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 6 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! तुम कह दो कि ऐ काफ़िरो !
2. मैं उन्हें नहीं पुकारता, जिन्हें तुम पुकारते हो,
3. और तुम उसकी इबादत नहीं करते, जिसकी मैं इबादत करता हूं,
4. और न मैं उन्हें कभी पुकारूंगा, जिन्हें तुम पुकारते हो.
5. और न तुम उसकी इबादत करोगे, जिसकी मैं इबादत करता हूं,
6. तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन, मेरे लिए मेरा दीन.

Saturday, June 5, 2021

110 सूरह अल नस्र

सूरह अल नस्र मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 3 आयतें हैं
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! जब अल्लाह की मदद आ पहुंची और फ़तह हासिल हो गई.
2. और तुमने देख लिया कि लोग फ़ौज दर फ़ौज अल्लाह के दीन में दाख़िल हो रहे हैं.
3. फिर तुम अपने परवरदिगार की हम्दो सना की तस्बीह करो और उससे मग़फ़िरत की दुआ मांगो. बेशक वह बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला है. 

Friday, June 4, 2021

111 सूरह अल लहब

सूरह अल लहब मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 5 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. अबु लहब के दोनों हाथ टूट गए और वह तबाह हो गया.
2. न उसका माल ही उसके काम आया और न वह, जो कुछ उसने कमाया.
3. अनक़रीब वह भड़कती हुई आग में डाला जाएगा.
4. और उसकी बीवी भी, जो कांटेदार लकड़ियों का बोझ सर पर उठाए फिरती है. 
5. उसकी गर्दन में खजूर की रस्सी का फंदा होगा.

Thursday, June 3, 2021

112 सूरह अल इख़लास

सूरह अल इख़लास मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 4 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तुम कह दो कि अल्लाह ही वाहिद है.
2. अल्लाह बेनियाज़ है. 
3. न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है.
4. और न उसका कोई हमसफ़र है.

Wednesday, June 2, 2021

113 सूरह अल फ़लक़

सूरह अल फ़लक़ मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 5 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! तुम कह दो कि मैं सुबह के परवरदिगार की पनाह चाहता हूं.
2. तमाम मख़लूक़ में पैदा बुराई से 
3. और तारीकी रात की बुराई से, जब उसका अंधेरा छा जाए
4. और गिरहों में फूंक करने वालों के शर से
5. और हसद करने वाले के शर से, जब वह हसद करने लगे.

Tuesday, June 1, 2021

114 सूरह अल नास

सूरह अल नास मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 6 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! तुम कह दो कि ऐ लोगो ! मैं इंसानों के परवरदिगार की पनाह चाहता हूं.
2. जो तमाम इंसानों का मालिक है.
3. जो तमाम लोगों का माबूद है.
4. उस शैतान के शर से, जो वसवसे डालकर पीछे हट जाता है.
5. जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है.  
6. जो जिन्नों में से भी होता है और इंसानों में से भी.