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Saturday, July 10, 2021

75 सूरह अल क़आमह

सूरह अल क़आमह मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 40 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़सम है क़यामत के दिन की.
2. और क़सम है बुराइयों पर मलामत करने वाली नफ़्स की.
3. क्या इंसान यह गुमान करता है कि हम उसकी हड्डियों को जमा नहीं करेंगे, जो उसके मरने के बाद रेज़ा-रेज़ा हो जाएंगी.
4. बेशक हम इस पर क़ादिर हैं कि उसकी उंगलियों के पोर-पोर को दुरुस्त कर दें.
5. लेकिन इंसान चाहता है कि वह अपनी आगे की ज़िन्दगी में भी गुनाह करता रहे.
6. वह पूछता है कि क़यामत का दिन कब आएगा?
7. फिर जब आंखें चौंधिया जाएंगी,
8. और चांद अपनी रौशनी खो देगा.
9. और सूरज और चांद बेनूर करके जमा किए जाएंगे.
10. उस दिन इंसान कहेगा कि भागकर कहां जाऊं.
11. जान लो कि अब कहीं पनाह नहीं है.
12. उस दिन तुम्हारे परवरदिगार के पास ही पनाह है.
13. उस दिन इंसान को उन आमाल से आगाह कर दिया जाएगा, जो उसने आगे भेजे थे और पीछे छोड़े थे.
14. बल्कि इंसान ख़ुद अपने आमाल को देखने वाला है.
15. और चाहे वह ख़ुद कितनी ही माज़रत करे.
16. ऐ मेरे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! तुम क़ुरआन को याद करने की जल्दी में अपनी ज़बान को हरकत न दिया करो.
17. बेशक उसे तुम्हारे दिल में जमा करना और तुम्हारी ज़बान से पढ़वाना हमारे ज़िम्मे है.
18. फिर जब हम उसे जिब्रईल अलैहिस्सलाम की ज़बानी पढ़ें, तो तुम क़ुरआन की पैरवी किया करो. 
19. फिर बेशक उसकी वज़ाहत करना भी हमारे ही ज़िम्मे है.
20. ऐ काफ़िरो ! जान लो कि हक़ीक़त में तुम जल्दी मिलने वाली दुनिया से मुहब्बत करते हो,
21. और तुम आख़िरत को छोड़े बैठे हो.
22. उस दिन बहुत से चेहरे शादाब होंगे.
23. उन्हें अपने परवरदिगार का दीदार होगा.
24. और उस दिन बहुत से चेहरों पर मायूसी होगी.
25. वे गुमान कर रहे होंगे कि उन पर मुसीबत आने वाली है, जो उनकी कमर तोड़ देगी.
26. जान लो कि जब जान गले तक पहुंच जाएगी,
27. और कहा जाएगा कि अब झाड़ फूंक करने वाला कौन है.
28. और मरने वाला गुमान करेगा कि अब जुदाई का वक़्त है,
29. और दर्द की वजह से पिंडली से पिंडली लिपट जाएगी.
30. उस दिन तुम्हें अपने परवरदिगार की तरफ़ लौटना है.
31. फिर उसने न अल्लाह के कलाम की तसदीक़ की और न नमाज़ पढ़ी.
32. और उसने हक़ को झुठलाया और नाफ़रमानी की.
33. फिर वह अपने घरवालों के पास इतराता हुआ चल दिया.
34. तुम्हारे लिए मौत के वक़्त तबाही है. फिर क़ब्र में भी तबाही है.
35. फिर तुम्हारे लिए क़यामत के दिन तबाही है. फिर दोज़ख़ में भी तबाही है.
36. क्या इंसान यह गुमान करता है कि उसे बिना हिसाब किताब के यूं ही छोड़ दिया जाएगा.
37. क्या वह अपनी इब्तिदा में एक नुत्फ़ा नहीं था, जिसे टपकाया जाता है.
38. फिर वह वजूद में आया, फिर वह पैदा हुआ. फिर उसे दुरुस्त किया.  
39. फिर उसी नुत्फ़े के ज़रिये उसकी दो क़िस्में मर्द और औरत बनाईं.
40. तो क्या अल्लाह इस पर क़ादिर नहीं कि वह मुर्दों को दोबारा ज़िन्दा कर दे.