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Tuesday, July 27, 2021

58 सूरह अल मुजादिला

सूरह अल मुजादिला मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 22 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. ऐ रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! बेशक अल्लाह ने उस औरत की बात सुन ली है, जो तुमसे अपने शौहर के बारे में तकरार कर रही थी और अल्लाह से फ़रियाद कर रही थी. और अल्लाह तुम दोनों की गुफ़्तगू सुन रहा था. बेशक अल्लाह ख़ूब सुनने वाला ख़ूब देखने वाला है.
2. तुममें से जो लोग अपनी बीवियों के साथ ज़हार करते हैं, यानी बीवी को मां कह देते हैं, इससे वे उनकी मांयें नहीं हो जातीं. उनकी मांयें तो सिर्फ़ वही हैं, जिन्होंने उन्हें जन्म दिया है और बेशक वे लोग बुरी और झूठी बात कहते हैं. बेशक अल्लाह बड़ा मुआफ़ करने वाला बड़ा बख़्शने वाला है.
3. जो लोग अपनी बीवियों से ज़हार कर बैठें, फिर अपनी बात वापस लें, तो उनके लिए कफ़्फ़ारे में एक गर्दन यानी एक ग़ुलाम को आज़ाद करना लाज़िम है, इससे पहले कि वे एक दूसरे को छुयें. तुम्हें इस बात की नसीहत की जाती है. और अल्लाह उन आमाल से ख़ूब बाख़बर है, जो तुम किया करते हो.
4. फिर जिसे ग़ुलाम न मिले, तो वे दो महीने तक मुसलसल रोज़े रखें, इससे पहले कि वे एक दूसरे को छुयें. फिर जो ऐसा न कर सकें, तो वे साठ मिस्कीनों को खाना खिलाएं. ये हुक्म इसलिए है, ताकि तुम अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर ईमान रखो. और ये अल्लाह की मुक़र्रर की हुई हदें हैं. और काफ़िरों के लिए दर्दनाक अज़ाब है.
5. बेशक जो लोग अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुख़ालिफ़त करते हैं, वे उसी तरह ज़लील किए जाएंगे जिस तरह उनसे पहले के लोग ज़लील किए गए हैं. और बेशक हमने वाज़ेह आयतें नाज़िल की हैं. और काफ़िरों के लिए ज़िल्लत अंगेज़ अज़ाब है.
6. जिस दिन अल्लाह उन सब लोगों को दोबारा ज़िन्दा करके उठाएगा, तो वह उन्हें उनके आमाल से आगाह कर देगा. अल्लाह ने उनके हर अमल को शुमार कर रखा है. हालांकि वे लोग उसे भूल चुके हैं. और अल्लाह हर चीज़ का गवाह है.
7. क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह उन सब चीज़ों को जानता है, जो आसमानों में हैं और जो ज़मीन में है. कहीं भी तीन आदमियों में कोई सरगोशी ऐसी नहीं होती, जिनमें अल्लाह चौथा न हो. और न पांच आदमियों में कोई सरगोशी ऐसी होती है, जिनमें वह छठा न हो. और आदमी चाहे इससे कम हों या ज़्यादा और चाहे जहां कहीं भी हों, वह हमेशा उनके साथ होता है. फिर क़यामत के दिन वह उन्हें उन आमाल से आगाह कर देगा, जो वे लोग किया करते थे. बेशक अल्लाह हर चीज़ का जानने वाला है.
8. क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्हें सरगोशियों से मना किया गया था. फिर भी वे वही काम करते रहे, जिससे उन्हें रोका गया था. और वे लोग गुनाह और सरकशी और रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नाफ़रमानी से मुताल्लिक़ सरगोशियां करते हैं. और जब तुम्हारे सामने हाज़िर होते हैं, तो तुम्हें उस कलमात के साथ सलाम करते हैं, जिनसे अल्लाह ने तुम्हें सलाम नहीं किया. और वे लोग दिल ही दिल में कहते हैं कि अगर वाक़ई ये रसूल सच्चे हैं, तो अल्लाह हमें उन बातों पर अज़ाब क्यों नहीं देता, जो हम कहते हैं? उनके लिए जहन्नुम ही काफ़ी है, जिसमें वे डाले जाएंगे. और वह बहुत बुरी जगह है.
9. ऐ ईमान वालो ! जब तुम आपस में सरगोशी करो, तो गुनाह और सरकशी और रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नाफ़रमानी की सरगोशी न किया करो, बल्कि नेकी और परहेज़गारी की सरगोशी करो. और अल्लाह से डरते रहो, जिसके सामने तुम सब जमा किए जाओगे.
10. बेशक बुरी सरगोशियां तो शैतानी हरकतें हैं, जो ईमान वालों को तकलीफ़ पहुंचाने के लिए की जाती हैं. हालांकि वह उन्हें कोई नुक़सान नहीं पहुंचा सकता, जब तक अल्लाह का हुक्म न हो. और ईमान वालों को अल्लाह पर ही भरोसा करना चाहिए.
11. ऐ ईमान वालो ! जब तुमसे कहा जाए कि मजलिसों में दूसरों को बैठने के लिए जगह दो, तो उन्हें जगह दे दिया करो. अल्लाह तुम्हें कुशादगी अता करेगा. जब तुमसे कहा जाए कि उठ जाओ, तो उठ जाया करो. अल्लाह उनके दर्जात बुलंद करेगा, तुममें से जो लोग ईमान लाए और जिन्हें इल्म से नवाज़ा गया है. और अल्लाह उन आमाल से ख़ूब बाख़बर है, जो तुम किया करते हो.
12. ऐ ईमान वालो ! जब तुम रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से तन्हाई में कोई राज़ की बात करना चाहो, तो उससे पहले कुछ सदक़ा दे दिया करो. ये तुम्हारे लिए बेहतर और पाकीज़ा अमल है. अगर तुम्हारे पास सदक़ा देने के लिए कुछ नहीं है, तो बेशक अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला  बड़ा मेहरबान है.
13. क्या तुम रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से तन्हाई में कोई राज़ की कहने से पहले सदक़ा देने की बात से घबरा गए ? फिर जब तुम इतना भी न कर सके और अल्लाह ने तुम्हें मुआफ़ कर दिया, तो तुम पाबंदी से नमाज़ पढ़ो और ज़कात देते रहो. अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की इताअत करो. और अल्लाह उन आमाल से ख़ूब बाख़बर है, जो तुम करते हो.
14. क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा, जो उस क़ौम से दोस्ती रखते हैं, जिस पर अल्लाह ने ग़ज़ब ढाया है. वे अब न तुम में से हैं और न उनमें से हैं. वे लोग झूठी क़समें खाते हैं. हालांकि वे जानते हैं.
15. अल्लाह ने उन लोगों के लिए सख़्त अज़ाब तैयार कर रखा है. बेशक वह बहुत बुरा काम है, जो वे लोग कर रहे हैं.
16. उन लोगों ने अपनी क़समों को ढाल बना लिया है. फिर वे दूसरों को अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं. फिर उनके लिए ज़िल्लत अंगेज़ अज़ाब है.
17. अल्लाह के अज़ाब से न उनका माल उन्हें बचा सकेगा और न उनकी औलाद ही उन्हें बचा पाएगी. वे असहाबे  दोज़ख़ हैं. वे उसमें हमेशा रहेंगे.
18. जिस दिन अल्लाह उन सब लोगों को दोबारा ज़िन्दा करके उठाएगा, तो वे उसके हुज़ूर में भी उसी तरह क़समें खाएंगे, जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते हैं. और यह गुमान करते हैं कि वे किसी अच्छी शय यानी रविश पर हैं. तुम उनसे होशियार रहो, बेशक वे लोग झूठे हैं.
19. उन लोगों पर शैतान ने क़ाबू पा लिया है और उन्हें अल्लाह का ज़िक्र भुला दिया है. वे लोग शैतान के गिरोह में शामिल हैं. जान लो कि बेशक शैतान का गिरोह नुक़सान उठाने वाला है.
20. बेशक जो लोग अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुख़ालिफ़त करते हैं, वे ज़लील लोगों में से हैं.
21. अल्लाह ने लिख दिया है कि अल्लाह और उसके रसूल ग़ालिब रहेंगे. बेशक अल्लाह बड़ा क़ूवत वाला बड़ा ग़ालिब है.
22. जो क़ौम अल्लाह और रोज़े आख़िरत पर ईमान रखती है, तुम उसके लोगों को अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुख़ालिफ़त करने वाले लोगों से दोस्ती रखते हुए नहीं देखोगे, अगरचे वे उनके वालिद या उनके बेटे या उनके भाई या उनके क़रीबी रिश्तेदार हों. यही वे लोग हैं, जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान को नक़्श कर दिया है और अपनी रूह से उनकी ताईद की है. और उन्हें जन्नत के उन सदाबहार बाग़ों में दाख़िल किया जाएगा, जिनके नीचे नहरें बहती हैं और वे हमेशा उसमें रहेंगे. अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वे अल्लाह से राज़ी हुए. जान लो कि बेशक यह अल्लाह वालों की जमात है. और अल्लाह वालों की जमात ही कामयाब होने वाली है.