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Sunday, August 1, 2021

53 सूरह अन नज्म

अन नज्म मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 62 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
1. क़सम है रौशन सितारे यानी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की, जब वे शबे मेराज में ऊपर जाकर वापस ज़मीन पर तशरीफ़ लाए.  
2. तुम्हारे साथी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न गुमराह हुए और न भटके.
3. और वे अपनी मर्ज़ी से कुछ भी नहीं कहते.
4. यह वही है, जो उनके पास भेजी जाती है. 
5. उन्हें निहायत क़ूवत वाले ने तालीम दी,
6. जो हुस्ने मुताल्लिक़ है. फिर उसने अपने ज़हूर का इरादा फ़रमाया.
7. और वे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आसमान के बुलंद किनारे पर थे. 
8. फिर वह जलवा ए हक़ अपने महबूब मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के क़रीब हुआ. फिर और ज़्यादा क़रीब हुआ. 
9. फिर जलवा ए हक़ और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दरम्यान दो कमानों का फ़ासला रह गया या उससे भी कम हो गया.
10. फिर अल्लाह ने अपने महबूब मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ़ वही पहुंचाई, जो भी वही थी.
11. उनके दिल ने उसे झुठलाया नहीं, जो कुछ उन्होंने देखा.
12. क्या तुम उनसे इस पर झगड़ते हो, जो कुछ उन्होंने देखा.
13. और बेशक उन्होंने उस जलवा ए हक़ को दूसरी मर्तबा फिर देखा है.
14. सिदरतुल मुनतहा के क़रीब.
15. उसी के क़रीब जन्नतुल मावा है.
16. जब नूरे हक़ की रौशनी सिदरतुल मुनतहा पर भी छा रही थी, जो भी छा रही थी.
17. और उनकी निगाह न उस तरफ़ माईल हुई और न हद से आगे बढ़ी.
18. बेशक उन्होंने अपने परवरदिगार की बड़ी-बड़ी निशानियां देखीं.
19. क्या तुमने देवी लात और उज़्ज़ा को देखा है. 
20. और एक तीसरी देवी मनात को देखा है.
21. ऐ मुशरिको ! क्या तुम्हारे लिए बेटे और अल्लाह के लिए बेटियां हैं.
22. यह इन्तिहाई नाइंसाफ़ी की तक़सीम है.
23. लेकिन हक़ीक़त यह है कि वे सिर्फ़ कुछ नाम हैं, जो तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिए हैं. अल्लाह ने उनकी निस्बत कोई सनद नाज़िल नहीं की. वे लोग महज़ वहम व गुमान और अपनी ख़्वाहिशों की पैरवी कर रहे हैं. हालांकि उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ़ से हिदायत आ चुकी है.
24. क्या इंसान के लिए वह सब मयस्सर है, जिसकी वह तमन्ना करता है. 
25. फिर आख़िरत और दुनिया का मालिक अल्लाह ही है. 
26. और आसमानों में कितने ही फ़रिश्ते हैं, लेकिन उनकी शफ़ाअत भी कुछ काम नहीं आएगी. अलबत्ता उसके बाद ही काम आ सकती है कि जब अल्लाह किसी को चाहे और उससे राज़ी हो और उसके हक़ में इजाज़त दे दे. 
27. बेशक जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते. वे फ़रिश्तों को औरतों के नाम से पुकारते हैं.
28. और उन्हें इसका कुछ भी इल्म नहीं है. वे सिर्फ़ अपने गुमान की पैरवी कर रहे हैं. और बेशक गुमान हक़ के मुक़ाबले में कुछ काम नहीं आता.
29. ऐ रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! फिर तुम अपनी तवज्जो उससे हटा लो, जो हमारे ज़िक्र से मुंह फेरता है. और उसने दुनियावी ज़िन्दगी के सिवा कुछ नहीं चाहा.
30. उन लोगों के इल्म की इन्तिहा बस यही है. बेशक तुम्हारा परवरदिगार उन लोगों को ख़ूब जानता है, जो उसके रास्ते से भटक गए हैं. और वह उनसे भी ख़ूब वाक़िफ़ है, जो लोग सीधे रास्ते पर हैं.
31. और वह अल्लाह ही का है, जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, ताकि अल्लाह बुरे काम करने वालों को उनके आमाल का बदला दे और अच्छे काम करने वालों को उनकी अच्छाई की जज़ा दे.
32. जो लोग सग़ीरा गुनाहों के सिवा कबीरा गुनाहों और बेहयाई के कामों से बचे रहते हैं. बेशक तुम्हारा परवरदिगार बड़ा बख़्शने वाला है. वह तुम्हें उस वक़्त से जानता है, जब उसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया और जब तुम अपनी माओं के पेटों में हमल की सूरत में थे. फिर तुम अपने नफ़्स की पाकीज़गी न जताया करो. वह बेहतर जानता है कि परहेज़गार कौन है.
33. क्या तुमने उस शख़्स को देखा है, जिसने हक़ से मुंह फेर लिया.
34. और उसने अल्लाह की राह में थोड़ा सा माल दिया और फिर हाथ रोक लिया.
35. क्या उसके पास ग़ैब का इल्म है कि वह देख रहा है.
36. क्या उसे उन बातों की ख़बर नहीं दी गई, जो मूसा अलैहिस्सलाम के सहीफ़ों में थीं.
37. और इब्राहीम अलैहिस्सलाम के सहीफ़ों में थीं, जिन्होंने वफ़ा की यानी अपना काम मुकम्मल किया. 
38. यह कि कोई भी किसी दूसरे के गुनाहों का बोझ नहीं उठाएगा.
39. और यह कि इंसान को वही मिलेगा, जिसकी उसने कोशिश की होगी.
40. और यह कि उसकी हर कोशिश अनक़रीब दिखा दी जाएगी.
41. फिर उन्हें उनकी हर कोशिश की पूरी-पूरी जज़ा दी जाएगी.
42. और यह कि आख़िर में सबको अपने परवरदिगार के पास ही जाना है.
43. और बेशक वही हंसाता है और वही रुलाता है.
44. और बेशक वही ज़िन्दगी बख़्शता है और वही मौत देता है.
45. और बेशक उसी ने नर और मादा की दो क़िस्मों को पैदा किया.
46. एक नुत्फ़े से, जो टपकाया जाता है. 
47. और यह कि वह क़यामत के दिन दोबारा ज़िन्दा करके उठाएगा.
48. और यह कि वही ग़नी करता है और वही जायदाद देकर ख़ज़ाने भर देता है.
49. और यह कि अल्लाह ही शेअरा तारे का परवरदिगार है.
50. और यह कि अल्लाह ही है, जिसने इससे पहले हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम आद को हलाक किया.
51. और सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम समूद को भी हलाक किया. फिर उनमें से किसी को भी बाक़ी नहीं छोड़ा.
52. और इससे पहले नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम को भी हलाक किया. बेशक वे लोग बड़े ही ज़ालिम और सरकश थे.
53. और उसी ने लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम की उलटने वाली बस्तियों को ऊपर उठाकर नीचे गिराया.
54. फिर उन्हें ढक दिया, जिसने भी ढका. यानी फिर उस पर पत्थरों की बारिश बरसाई. 
55. ऐ इंसानो ! फिर तुम अपने परवरदिगार की किन-किन नेअमतों पर शक करोगे.
56. ये रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी ख़बरदार करने वाले पैग़म्बरों में से एक पैग़म्बर हैं.
57. आने वाली क़यामत की घड़ी क़रीब आ गई.
58. अल्लाह के सिवा उसे कोई ज़ाहिर और क़ायम करने वाला नहीं है.
59. ऐ काफ़िरो ! क्या तुम इस हदीस पर ताज्जुब करते हो. 
60. और तुम हंसते और रोते नहीं हो. यानी तुम्हें ज़रा भी मलाल और दुख नहीं है.
61. और तुम ग़फ़लत में मुब्तिला होकर खेल कर रहे हो. 
62. फिर तुम अल्लाह की बारगाह में सजदा करो और उसकी इबादत किया करो.