Friday, July 2, 2021

83 सूरह अल मुत्ताफ़िकीन

सूरह अल मुत्ताफ़िकीन मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 36 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
1. नाप तौल में कमी करने वालों के लिए तबाही है.
2. जो दूसरों से नाप तौल कर लेते हैं, तो उनसे पूरा लेते हैं.
3. और जब उन्हें ख़ुद नाप तौल कर देते हैं, तो कम कर देते हैं.
4. क्या वे लोग इस पर यक़ीन नहीं करते कि वे मरने के बाद दोबारा ज़िन्दा करके उठाए जाएंगे ?
5. एक बड़े सख़्त दिन में. 
6. जिस दिन सब लोग तमाम आलमों के परवरदिगार के हुज़ूर में पेश होंगे.
7. जान लो कि बेशक बदकारों के आमालनामे सिज्जीन में हैं.
8. और क्या तुम जानते हो कि सिज्जीन क्या है?
9. यह लिखी हुई एक किताब है. यानी दोज़ख़ के दीवानख़ाने में रखी इस किताब में हर दोज़ख़ी का नाम और उसके आमाल दर्ज हैं.     
10. उस दिन उन झुठलाने वाले लोगों के लिए तबाही है.
11. जो लोग जज़ा के दिन को झुठलाते हैं.
12. और उसे कोई नहीं झुठलाता सिवाय हर उस शख़्स के, जो सरकश और गुनाहगार है.
13. जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़कर सुनाई जाती हैं, तो वह कहता है कि ये पहले के लोगों के अफ़साने हैं.
14. ऐसा हरगिज़ नहीं है, बल्कि हक़ीक़त यह है कि उन लोगों के दिलों पर उन बुरे आमाल का ज़ंग लग गया है, जो वे कमाया करते थे. यानी उन पर पाक आयतों का कोई असर नहीं होता.  
15. जान लो कि बेशक उस दिन उन्हें उनके परवरदिगार के दीदार से रोकने के लिए पर्दा कर दिया जाएगा.
16. फिर बेशक उन्हें जहन्नुम में डाल दिया जाएगा.
17. फिर उनसे कहा जाएगा कि यही वह जहन्नुम का अज़ाब है, जिसे तुम झुठलाया करते थे.
18. जान लो कि बेशक नेक लोगों के आमालनामे इल्लीयीन में हैं.
19. और क्या तुम जानते हो कि इल्लीयीन क्या है? 
20. यह एक लिखी हुई किताब है. यानी जन्नत के दीवानख़ाने में रखी इस किताब में जन्नतियों के नाम और उनके आमाल दर्ज हैं.
21. जिसके क़रीब अल्लाह के मुक़र्रिब फ़रिश्ते हाज़िर रहते हैं.
22. बेशक नेक लोग नेअमतों वाली जन्नत में होंगे.
23. वे तख़्त पर बैठे देख रहे होंगे.
24. तुम उनके चेहरों से ही अल्लाह की बेशुमार नेअमतों और राहत की ताज़गी महसूस कर लोगे.
25. उन्हें मुहरबंद शराबे तहूर यानी पाकीज़ा शर्बत पिलाया जाएगा,
26. उसकी मुहर मुश्क की होगी और ख़्वाहिशमंदों को उसे हासिल करने के लिए सबक़त करनी चाहिए. 
27. और उसमें तसनीम का पानी मिला होगा.
28. यह एक चश्मा है, जिसका पानी सिर्फ़ अल्लाह के मुक़र्रिब बन्दे ही पीते हैं.
29. बेशक गुनाह करने वाले लोग दुनिया में ईमान वालों का मज़ाक़ उड़ाया करते थे.
30. और जब वे उनके पास से गुज़रते, तो आंखों से इशारेबाज़ी करते थे.
31. और जब वे अपने घरवालों की तरफ़ लौटते, तो दिल्लगी करते हुए आते.
32. और जब वे मोमिनों को देखते तो कहते कि बेशक ये लोग राह से भटक गए हैं.
33. हालांकि वे लोग उन पर निगेहबान बनाकर नहीं भेजे नहीं गए थे.
34. फिर आज ईमान वाले काफ़िरों पर हंसेंगे.
35. वे तख़्तों पर बैठे उन्हें देख रहे होंगे.
36. क्या काफ़िरों को उसका पूरा-पूरा बदला दे दिया गया, जो कुछ वे किया करते थे. 

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